Wednesday, October 8, 2008

आतंकवाद

प्रेम शुक्ल

दुनिया के नक्शे पर इस समय तीन देश ऐसे हैं जो इस्लामी जेहाद के कारण खात्मे के कगार पर पहुंच चुके हैं। ये देश हैं- इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान. इन तीन देशों के बाद भारत ऐसा चौथा देश बन गया है जहां इस्लामिक जेहाद का जोर सबसे ज्यादा प्रबल हो रहा है. अमेरिकी नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर रिपोर्ट-२००७ हमें बता रहा है कि अगर समय रहते हम नहीं चेते तो इस्लामी आतंकवाद के कारण गृहयुद्ध की आग में झुलसने वाला अगला देश भारत ही होगा. पाकिस्तान तो खैर पहले ही बर्बाद हो चुका है. जिस अंदाज में होटल मैरियट उड़ाया गया है उससे एक संकेत साफ है कि पाकिस्तान के अंदर इतना जेहादी बारूद तैयार है कि जब चाहें तब पूरे हुक्काम को खत्म कर सकते हैं. पाकिस्तान बचे या खत्म हो जाए, यह हमारी चिंता का विषय नहीं है. लेकिन भारत में जिस तरह से इस्लामी आतंकवाद का लालन-पालन किया जा रहा है वह इन चिंताओं के कोढ़ में खाज की तरह है. जामिया मिलिया के कुलपति कहते हैं कि न्याय के लिए वे विश्वविद्यालय के फण्ड से उन "लड़कों" का केस लड़ने में मदद करेंगे जो पुलिस के जुर्म का शिकार हुए हैं. हमारे मानव संसाधन मंत्री को यह सदाशय इच्छा बहुत भाई और उन्होंने तुरंत कुलपति का समर्थन कर दिया. खौफ आतंकवाद से नहीं, खौफ आतंकवाद को पालने-पोसनेवाले ऐसे नेताओं और बुद्धिमान लोगों से पैदा होता है. दिल्ली में हुए विस्फोट के लिए केन्द्रीय गृहमंत्री से नाराजगी बहुतों की है. इसमें अमर सिंह और लालू प्रसाद जैसे टुटपुजियां समझ वाले नेता भी शामिल हैं. सुना है दिल्ली विस्फोटों के बाद लालू प्रसाद सोनिया गांधी के पास गये थे. उन्होंने मांग की थी कि गृहमंत्री नकारा हो चुके हैं और उन्हें तत्काल बर्खास्त किया जाए. सोनिया गांधी ने लालू प्रसाद को याद दिलाया कि अभी तक तो वे सिमी की जोरदार वकालत करते आ रहे हैं. ऐसे में एक ओर सिमी का समर्थन और दूसरी ओर सिमी द्वारा की गयी आतंकी गतिविधियों के लिए गृहमंत्री को जिम्मेदार ठहराकर उनका इस्तीफा मांगना कहां तक जायज है? काश ऐसी ही कोई सलाह सोनिया गांधी अमर सिंह जैसे नेताओं को दे पातीं. समाजवादी पार्टी के मुंह में बवासीर अमर सिंह अपने घर पर बुलाए गये बसपा के मुस्लिम कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी में सहयोग न कर पाने पर गृहमंत्री पर हमला बोलते हैं. वे सबको बताते हैं कि जब तक शिवराज पाटिल जैसे नकारा गृहमंत्री हैं तब तक आतंकवाद से सख्ती से नहीं निपटा जा सकता. यह दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है कि अमर सिंह जैसे लोग भी आतंकवाद से न लड़ पाने के लिए शिवराज पाटिल पर बरस रहे हैं. क्या अमर सिंह को याद है कि उनकी ही पार्टी में एक राज्यसभा सांसद हैं अबू आसिम आजमी. वे वहीं से आते हैं जो आजकल आतंकियों के गढ़ के रूप में बदनाम हो रहा है. आजमी आतंकवादियों के सबसे बड़े पैरोकार हैं. उसने खुलेआम ऐलान किया है कि वह अहमदाबाद बम विस्फोट के मुख्य आरोपी अबू बशीर की मदद करेगा. उसने जामिया नगर में मारे गये युवकों को "शरीफ" करार दिया है. पिछले १५ सालों में उसी अबू हाशिम आजमी ने भारत के विभिन्न् हिस्सों में कराये गये अभियुक्तों के परिजनों को खाड़ी देशों से मिले मोटे चंदे के बल पर मदद पहुंचाई है. अमर सिंह को निश्चित रूप से शिवराज पाटिल का इस्तीफा मांगने से पहले अबू आसिम आजमी से इस्तीफा मांगना चाहिए.महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और गृह-मंत्रालय के प्रभारी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि यहां सपा के कुछ नेताओं के पाकिस्तानी खुफिया एजंसी आईएसआई से सीधे संपर्क रहे हैं. अमर सिंह और मुलायम सिंह तो इस मामले में बड़े मियां हैं. छोटे मियां रामविलास पासवान भी अपने असली रंग में हैं. वे कह रहे हैं कि जो बांग्लादेशी पहले से भारत में रह रहे हैं उन्हें अब भारत की नागरिकता दे दी जाए. यहां यह भी जान लीजिए कि बांग्लादेश का ही आतंकी संगठन हूजी विभिन्न बमकाण्डों में इंडियन मुजाहीदीन के मददगार के रूप में सामने आ रहा है. डीएमके प्रमुख तो कोयंबटूर बम काण्ड में मौलाना मदनी की खुलेआम मदद कर चुके हैं. संसद पर हमले में सजायाफ्ता मुजरिम अफजल गुरू को तो यूपीए के तमाम घटक दल सरकारी दामाद की मान्यता दे ही रखी है. २००६ तक देश में जो भी आतंकी हमला होता था उसके लिए हम पाकिस्तान और आईएसआई को जिम्मेदार ठहराकर अपने जिम्मेदारियों की खानापूर्ति कर लेते थे. लेकिन अब पिछले दो सालों में हमारे शक की यह अंगुली पाकिस्तान की बजाय बांग्लादेश की ओर घूम गयी है. गृह मंत्रालय की संसदीय स्थाई समिति का कहना है कि देश में अवैध रूप से ढाई करोड़ बांग्लादेशी रह रहे हैं. ये अवैध बांग्लादेशी यहां क्या कर रहे हैं और किन गतिविधियों में लिप्त हैं इसका कोई आंकड़ा हमारे पास नहीं है. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की आंतरिक हालत इतनी खराब है कि अब वह आतंक को फण्ड करने में सक्षम नहीं रहा. वह फाटा और उत्तर पश्चिमी सीमा प्रांत में उलझा हुआ है. हमारी अपनी खुफिया एजंसियां इससे खुश हैं कि उनकी हालत इतनी पतली हो गयी है कि अब वे आतंकियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं. लेकिन खतरा कितना बड़ा है यह पिछले कुछ सालों में हम सब देख रहे हैं. आतंक की जिस नर्सरी को अब तक पाकिस्तान और आईएसआई पल्लवित पुष्पित कर रहे थे वह काम अब हमारे नेताओं ने अपने हाथ में ले लिया है. उनकी राजनीतिक दकियानूसी और निहित स्वार्थ की बदौलत मुसलमानों ने अपना मुस्लिम ब्रदरहुड विकसित कर लिया है जो आतंक के लिए धन और समर्थन जुटाने का काम करता है. यही मुस्लिम ब्रदरहुड सिमी जैसी संस्थाओं को आर्थिक मदद देता है. इस मुस्लिम ब्रदरहुड में कोई दस लाख नाम दर्ज हैं जिसमें पचास हजार अकेले आजमगढ़ से हैं. मुस्लिम ब्रदरहुड अगर आतंक को पालने-पोसने और आगे बढ़ाने के लिए धन इकट्ठा करता है तो ह्वाईट फाल्कन ग्रुप गरीब मुसलमान बच्चों को मजहबी तालीम के नाम पर मदरसों में आतंक के पाठ पढ़ाता है. इसमें पांच से लेकर दस साल के बच्चों की धड़ल्ले से भर्ती की जाती है और जेहाद का पाठ पढ़ाया जाता है. इस ह्वाईट फाल्कन द्वारा जो बच्चे प्रशिक्षित किये जाते हैं उन्हें अंसार कहा जाता है. ये अंसार ही हमलों की साजिश रचते हैं और विस्फोटकों की खरीद-फरोख्त करते हैं. इन अंसारों के समानांतर ही इख्वान नामक ग्रुप भी सक्रिय है. एक अंसार के समानांतर १० इख्वान है. इख्वान अधिकतर निष्क्रिय रहते हैं इसलिए खुफिया एजंसियां उन्हें पहचान नहीं पाती. जब जरूरत होती है तभी इख्वान को सक्रिय किया जाता है. इख्वान को मदद करता है काल आफ इस्लाम नामक संगठन. हर इख्वान को मदद करने के लिए काल आफ इस्लाम के १० कार्यकर्ता, प्रचारक, अध्यापक और प्रोफेशनल सक्रिय रहते हैं. यह जिहाद का एक चुस्त-दुरूस्त देशी नेटवर्क है जिसे किसी प्रकार की विदेशी मदद की आवश्यकता नहीं है. होना तो यह चाहिए कि भारत सरकार तेजी से सक्रियता दिखाते हुए आतंक के इस देशी नेटवर्क को ध्वस्त करे. ठीक वैसे ही जैसे अफगानिस्तान में तालिबान और पाकिस्तान में कट्टरपंथी समूहों को किया जा रहा है. लेकिन हमारे यहां इसके उलटा हो रहा है. लालू, मुलायम, पासवान जैसे वोटबैंक की राजनीति करनेवाले नेता इन समूहों को नष्ट करने में मदद करने की बजाय उनको घोषित-अघोषित समर्थन दे रहे हैं.