भारत में आंचलिक संस्कृति की जब-जब चर्चा की जाती है, तो भोजपुरिया संस्कृति और परम्परा की बात किए बिना सब सूना लगता है। इसकी महक अब दूर -दूर तक फैलने लगी है। पहले हिन्दी फिल्मों में भोजपुरिया शैली की छवंक देखी जाती थी। आज कल भोजपुरी पत्रकारिता का चलन बढ़ा है। पत्र-पत्रिका के साथ-साथ चैनल का दौर आया है। भोजपुरी चैनल "महुआ" में इस संस्कृति की झलक देखने को मिल रहा है। "महुआ" के "बिहाने-बिहाने" कार्यक्रम दूर परदेश रहने वाले लोगों को लुभा रहा है । कार्यक्रम आधे घंटे का है। इसे पेस कर रहीं हैं लोक संगीत की दुनिया की मशहूर हस्ती विजया भारती। जिसमे " देवर-भाभी" की प्रस्तुति के जरिय योग, लोक गायकों से मुलाकात, धार्मिक स्थल की यात्रा कराई जाती है।
साभार- आपन माटी
Saturday, October 4, 2008
एक और सदमा
पिछले दिनों हुई वीएस वाजपेई की मौत के सदमे से उबर नहीं पाया की आज सुशील त्रिपाठी के मरने की ख़बर ने आहट कर दिया। ये दोनों दिवंगत आत्माएं अपने आप में अद्वितीय थी।
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